दस साल से मंत्रीमंडल विस्तार में चमोली को नहीं मिला प्रतिनिधित्व

गोपेश्वर (चमोली)। भाजपा सरकार के मंत्रीमंडल विस्तार में भी चमोली जनपद को मायूसी ही मिली है। इस तरह कहा जा सकता है कि दस साल से चमोली जिले को मंत्रीमंडल में प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है तो रूद्रप्रयाग जनपद को दस साल बाद मंत्रीमंडल में जगह मिल गई है। बताते चले कि चमोली जिले की कर्णप्रयाग विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व भाजपा के अनिल नौटियाल कर रहे हैं। नौटियाल 2002 से 2012 तक लगातार कर्णप्रयाग से विधायक निर्वाचित होते रहे। 2012 में भाजपा से उनका टिकट काट दिया गया और हरीश पुजारी को प्रत्याशी घोषित किया गया। पुजारी कांग्रेस के अनसूया प्रसाद मैखुरी के हाथों पराजित हुए। 2017 के विधानसभा चुनाव में गैरसैण के पूर्व प्रमुख सुरेंद्र सिंह नेगी को भाजपा ने उम्मीदवार बनाया और वह विधायक पद पर निर्वाचित हो गए। यकायक स्वास्थ्य खराबी के चलते 2022 में नेगी का टिकट काट दिया गया। इससे पूर्व तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र रावत ने अनिल नौटियाल को पार्टी में दावेदार के रूप में खड़ा कर दिया। तीरथ सिंह रावत सरकार में उन्हें दायित्वधारी बना दिया गया। 2022 के चुनाव में भाजपा ने फिर से अनिल नौटियाल पर दांव खेला और वह तीसरी बार कर्णप्रयाग विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। माना जा रहा था कि वरिष्ठता से आधार पर नौटियाल को मंत्रीमंडल विस्तार में जगह मिलेगी किंतु उनकी वरिष्ठता को नजरंदाज कर दिया गया।

थराली विधानसभा सीट भी भाजपा की झोली में है। भाजपा के मगन लाल 2017 में इस सीट पर चुनाव जीते थे। यकायक अस्वस्थ्य होने के चलते उनकी असमय मौत हो गई। विधानसभा के उप चुनाव में भाजपा ने मगन लाल की पत्नी मुन्नी देवी को मैदान में उतारा और वह जीत दर्ज करने में सफल रही। 2022 के चुनाव में भूपाल राम टम्टा को भाजपा ने उम्मीदवार बनाया। वह जीत दर्ज करने में सफल रहे। माना जा रहा था कि दलित कोटे से भूपाल राम को मंत्रीमंडल में जगह मिल जाएगी किंतु आज के विस्तार में वह भी इस पद पर काबिज नहीं हो पाए। बदरीनाथ सीट की बात करें तो 2012 में कांग्रेस के टिकट पर राजेंद्र सिंह भंडारी चुनाव जीते थे। हरीश रावत सरकार में उन्हें काबीना मंत्री का ओहदा मिला। 2017 का चुनाव भंडारी हार गए और भाजपा के महेंद्र भट्ट चुनाव जीत गए। महेंद्र भट्ट 2002 में नंदप्रयाग के विधायक भी रह चुके हैं। 2022 में भी कांग्रेस के टिकट पर भंडारी जीत गए। इसके बाद 2024 में उन्होंने विधायकी से इस्तीफा देकर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। 2024 के उप चुनाव में भंडारी रिपीट नहीं कर पाए और कांग्रेस के लखपत बुटोला से चुनाव हार गए। इस तरह कहा जा  सकता है कि पिछले दस सालों से चमोली को मंत्रीमंडल में प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है। हालांकि नंदप्रयाग से निर्दलीय विधायक बनने पर भाजपा को समर्थन के एवज में भंडारी को काबीना मंत्री का ओहदा मिला था। इस तरह चमोली जनपद पिछले दस वर्षों से मंत्रीमंडल में जगह पाने की बाट जोहता रहा किंतु शुक्रवार के मंत्रीमंडल विस्तार में चमोली को निराशा ही हाथ लगी है।

भाजपा की सियासत में दखल रखने वाले प्रेक्षकों का मानना है कि 2022 में बदरीनाथ से पराजित का सामना करने वाले महेंद्र भट्ट को भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष तो बनाया ही गया अपितु राज्य सभा का सदस्य बना कर भी उपकृत कर दिया गया। इसी के चलते चमोली को इस बार मंत्रीमंडल में जगह नहीं मिल पाई। इस तरह कहा जा सकता है कि राज्य बनने के बाद 2002 के पहले चुनाव से लेकर अब तक राजेंद्र भंडारी को दो बार चमोली जनपद के नाम पर मंत्रीमंडल में प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है।

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