डीएम स्वाति एस. भदौरिया ने कोटद्वार में विकास परियोजनाओं का किया स्थलीय निरीक्षण, गुणवत्ता और समयबद्धता पर कड़े निर्देश

  • कोटद्वार में आधारभूत ढांचे को मजबूती देने को डीएम का क्षेत्रीय निरीक्षण: सीवरेज, स्वास्थ्य व मंडी व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर
  • जिलाधिकारी ने मंडी की न्यून आय पर जतायी नाराजगी, किराया वसूली में तेजी लाने तथा कोल्ड स्टोरेज बनाने हेतु दिये निर्देश
  • आयुर्वेदिक अस्पताल के सुचारू संचालन के लिए पदों को सृजित करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश

पौड़ी : जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने गुरुवार को कोटद्वार क्षेत्र में संचालित विभिन्न महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण कर प्रगति का जायज़ा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने काशीरामपुर तल्ला में निर्माणाधीन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), हल्दूखाता में बन रहे आयुर्वेदिक चिकित्सालय तथा कृषि उत्पादन मंडी समिति का निरीक्षण किया। जिलाधिकारी ने कार्यों में पायी गयी खामियों पर कड़ी नाराज़गी जताई और संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्यों में लापरवाही, गुणवत्ता में कमी या अनावश्यक विलंब किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा तथा निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी कार्य उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएं।

निरीक्षण के क्रम में जिलाधिकारी सबसे पहले काशीरामपुर तल्ला पहुंचीं, जहां उन्होंने 21 एमएलडी क्षमता के निर्माणाधीन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का जायज़ा लिया। उन्होंने कार्यदायी संस्था के अधिकारियों से परियोजना की प्रगति, कार्य की गुणवत्ता तथा मौके पर कार्यरत श्रमिकों की संख्या के बारे में जानकारी प्राप्त की। जिलाधिकारी ने कहा कि एसटीपी का निर्माण क्षेत्र में स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए निर्माण कार्य को निर्धारित मानकों के अनुरूप तेज गति से आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने सड़कों को खुद देखकर नाराज़गी व्यक्त की और एक माह के भीतर उन्हें पूर्ववत स्थिति में लाने के निर्देश दिए। साथ ही निर्देश दिए कि लोक निर्माण विभाग से समन्वय स्थापित कर सड़कों का डामरीकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि स्थानीय नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कार्यदायी संस्था से नीलकंठ और स्वर्गाश्रम क्षेत्र में निर्माणाधीन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की प्रगति के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि गंगा और उसकी सहायक नदियों की स्वच्छता बनाए रखने के लिए सीवरेज प्रबंधन की योजनाओं को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाना आवश्यक है।

इसके बाद जिलाधिकारी ने हल्दूखाता में निर्माणाधीन 50 बेड के आयुर्वेदिक चिकित्सालय का निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पताल परिसर में रैंप, लिफ्ट, सीढ़ियां, पंचकर्म एवं योग वार्ड, इमरजेंसी वार्ड, ओपीडी कक्ष, पार्किंग तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। प्रभारी चिकित्साधिकारी आयुर्वेदिक ने जानकारी दी कि यह चिकित्सालय लगभग 17.58 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है। इसका निर्माण कार्य मार्च 2024 में प्रारंभ हुआ था और इसे दिसंबर 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।

जिलाधिकारी ने कहा कि आयुर्वेदिक चिकित्सालय के संचालन से क्षेत्रीय लोगों को पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के माध्यम से बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि अस्पताल के निर्माण के लिए दूसरी किश्त की धनराशि का प्रस्ताव शीघ्र शासन को भेजा जाए। साथ ही उन्होंने आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी को अस्पताल के सुचारु संचालन के लिए आवश्यक चिकित्सकीय एवं तकनीकी पदों के सृजन की प्रक्रिया प्रारंभ करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल के लिए आवश्यक चिकित्सीय उपकरणों की मांग समय रहते शासन को भेजी जाए, ताकि अस्पताल के शुरू होते ही मरीजों को सभी सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

इसके बाद जिलाधिकारी ने कृषि उत्पादन मंडी समिति का निरीक्षण कर मंडी की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने मंडी शुल्क से संबंधित जानकारी प्राप्त की तथा व्यापारियों की सूची का अवलोकन किया। जिलाधिकारी ने कहा कि मंडी समितियां किसानों और व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधियों का केंद्र होती हैं, इसलिए यहां की व्यवस्थाओं को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाए रखना आवश्यक है।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने प्रमुख चुंगी चेक प्वाइंट पर एकीकृत रूप से सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए, ताकि मंडी शुल्क की वसूली पारदर्शी ढंग से हो सके और किसी प्रकार का शुल्क लीकेज न हो। उन्होंने इस संबंध में आवश्यक प्रस्ताव तैयार कर शीघ्र स्वीकृति के लिए भेजने को कहा। साथ ही व्यापारियों के गोदामों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए, जिससे मंडी संचालन सुव्यवस्थित बना रहे।

जिलाधिकारी ने मंडी परिसर में स्थित स्टोर रूम, कंप्यूटर कक्ष एवं विपणन कक्ष का भी निरीक्षण किया और वहां उपलब्ध व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने निर्देश दिए कि मंडी परिसर में आवश्यक सुविधाएं जैसे स्वच्छ पेयजल के लिए वाटर कूलर, ऊर्जा दक्षता के लिए सोलर लाइट तथा अन्य आधारभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं, ताकि किसानों और व्यापारियों को बेहतर वातावरण मिल सके।

उन्होंने मंडी समिति के जनवरी और फरवरी माह के आय-व्यय का लेखा-जोखा भी देखा। समीक्षा के दौरान व्यय आय से अधिक पाए जाने पर जिलाधिकारी ने नाराज़गी जताते हुए कड़ी कार्रवाई की चेतावनी देते हुए कहा कि मंडी की आय बढ़ाने के लिए नए स्रोतों की तलाश की जाए तथा राजस्व संग्रहण को सुदृढ़ किया जाए। साथ ही जिन दुकानों का किराया लंबित है, उनसे शीघ्र वसूली सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किराया नियमित रूप से संग्रहण नहीं हो पा रहा है तो संबंधित दुकानदारों के विरुद्ध आरसी जारी कर राजस्व वसूली की कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने व्यापारियों से संवाद कर व्यापार की स्थिति भी जानी।

जिलाधिकारी ने मंडी परिसर में पीठ बाजार लगाने की व्यवस्था विकसित करने के भी निर्देश दिए, जिससे स्थानीय व्यापार को प्रोत्साहन मिलने के साथ मंडी की आय में भी वृद्धि हो सके।

निरीक्षण के दौरान उपजिलाधिकारी कोटद्वार संदीप कुमार, तहसीलदार साक्षी उपाध्याय, एसटीपी परियोजना के प्रोजेक्ट मैनेजर एस.के. वर्मा, प्रोजेक्ट इंजीनियर दीपक वत्स, प्रभारी चिकित्साधिकारी आयुर्वेदिक डॉ. अंजना पंत सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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