आरएसएस के शताब्दी वर्ष पर रुड़की क्षेत्र में हिन्दू सम्मेलन, गंगा-गाय-गीता-गायत्री व नारी सम्मान को बताया हिन्दू संस्कृति की पहचान

रुड़की : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर रुड़की क्षेत्र के खंजरपुर व कुंजा बहादुरपुर में आयोजित हिन्दू सम्मेलन में संतों और वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में पूरे विश्व को हिन्दू जीवनदर्शन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हिन्दू संस्कृति के मूल तत्व – गंगा, गाय, गीता, गायत्री, तुलसी, गुरु और नारी सम्मान – मानव समाज को शांति, समरसता और संतुलित जीवन का मार्ग दिखाते हैं। सम्मेलन में संगठित हिन्दू समाज को सशक्त भारत की आधारशिला बताते हुए युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में देशभर में मंडल और बस्ती स्तर पर आयोजित किए जा रहे विराट हिन्दू सम्मेलनों की श्रृंखला में रुड़की क्षेत्र के खंजरपुर व कुंजा बहादुरपुर में सर्व समाज के सहयोग से हिन्दू सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए संतों और वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में पूरे विश्व को हिन्दू जीवनदर्शन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि गंगा, गाय, गीता, गायत्री, तुलसी, गुरु और नारी सम्मान हिन्दू संस्कृति की विशेष पहचान हैं, जो समाज को नैतिकता, समरसता और संतुलित जीवन का मार्ग दिखाती हैं। वक्ताओं ने कहा कि सभी उपासना पद्धतियां एक ही परम शक्ति की आराधना करती हैं और सम्पूर्ण सृष्टि में एक ही चेतना विद्यमान है। हिन्दू दर्शन में मातृत्व के प्रति सम्मान, प्रकृति के साथ समरसता तथा जीवन के मूल्यों को सर्वोपरि माना गया है। उन्होंने कहा कि हिन्दू होने पर गर्व होना चाहिए और हिन्दू जीवन मूल्यों को अपनाने से ही विश्व में शांति और सद्भाव स्थापित हो सकता है। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में बाजारवाद, अलगाववाद, आतंकवाद, नारी शोषण और ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याएं समाज के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभरी हैं। ऐसे में हिन्दू जीवन मूल्यों को अपनाकर ही इन चुनौतियों का समाधान संभव है।

सम्मेलन में वक्ताओं ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की यात्रा का उल्लेख करते हुए संघ के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संघ के संस्थापक डॉ. केशव राव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में हिन्दू समाज को संगठित करने के उद्देश्य से संघ की स्थापना की थी। स्वतंत्रता आंदोलन, 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन, 1947 के विभाजन के समय विस्थापित लोगों की सहायता तथा 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान स्वयंसेवकों द्वारा किए गए कार्यों का भी उल्लेख किया गया।

वक्ताओं ने कहा कि परिवर्तन केवल सत्ता से नहीं बल्कि समाज से आता है। संगठित हिन्दू समाज ही सशक्त भारत का निर्माण कर सकता है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र के गौरवशाली इतिहास को जानने और देशभक्ति की भावना के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। कार्यक्रम में हजारों हिन्दू समाज के लोग उपस्थित रहे और अंत में सभी ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया।

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