चारधाम यात्रा तैयारियों के मोर्चे पर खरा उतरने की चुनौती

गोपेश्वर (चमोली)। गैरसैण विधानसभा का बजट सत्र निपटाने के बाद अब चमोली के सरकारी अमले के सामने चारधाम यात्रा तैयारियों के मोर्चे पर डटने की चुनौती आ खड़ी हो गई है। बताते चलें कि चमोली का सरकारी अमला ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र की व्यवस्थाओं को जुटाने में तैनात रहा था। इस मोर्चे पर खरा उतरने के बाद अब सरकारी अमले के सामने 23 अप्रैल से शुरू होने जा रही श्री बदरीनाथ धाम की यात्रा की तैयारियों में जुटने की चुनौती आ खड़ी हो गई। इस साल 19 अप्रैल को यमुनोत्री तथा गंगोत्री, 22 को केदारनाथ और 23 अप्रैल बदरीनाथ मंदिर के कपाट खुलने जा रहे हैं।

इस बार उत्तराखंड के चारों धामों के कपाट काफी पहले खुलने जा रहे हैं तो अभी से तैयारियों को भी अंतिम रूप देना होगा। चमोली जिले में तो बदरीनाथ धाम की यात्रा को सुरक्षित और निरापद बनाने की चुनौती बनी है। हालांकि पिछले सालों की तरह शीतकाल में बर्फवारी न होने के कारण पहले तक कोई दिक्कतें नहीं दिखाई दे रही थी। अब जबकि मौसम का मिजाल बिगड़ने लगा है तो बदरीनाथ धाम में भी बर्फवारी होने से अब व्यवस्थाओं को जुटाना मुश्किल भरा होगा। अभी भी मौसम रंग दिखा रहा है। इसके चलते मौसम का बिगड़ा मिजाज तैयारियों में खलल पैदा कर सकता है। फिर भी 23 अप्रैल से बदरीनाथ धाम की यात्रा को सुचारू बनाए रखने के लिए बदरीनाथ पुरी में तमाम व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना होगा। इसके अलावा कमेड़ा से बदरीनाथ और भुलकना से चमोली तक के यात्रा मार्ग को व्यवस्थित करना भी चुनौती बनी हुई है। खासकर डेंजर प्वाइंट पर सड़क को सुरक्षित बनाना आसान भी नहीं है। तीर्थयात्रियों के लिए बिजली, पानी की बहाली से लेकर अन्य जरूरी सुविधाओं की बहाली पर भी इस बीच जोर देना होगा। वैसे भी पिछले साल पहलगांव की आतंकी घटना के चलते तीर्थाटन और पर्यटन कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ था। इसके बाद धराली, थराली तथा नंदानगर की दैवीय आपदा ने यात्रा को चैपट कर दिया था। इसके चलते तीर्थाटन और पर्यटन कारोबारियों को मायूसी का सामना करना पड़ा था।

मौजूदा साल में यात्रा काफी पहले ही शुरू होने  जा रही है तो उत्तराखंड की आर्थिकी का प्रमुख आधार बनी चारधाम यात्रा पर कारोबारियों की नजरें टिकी हैं। इसलिए चारधाम यात्रा के जरिए बेहतर आर्थिकी और रोजगार पाने की उम्मींदें संजोए लोग भी अगले कुछ दिनों में होटल, लाॅज तथा होम स्टे को व्यवस्थित करने में जुट जाएंगे। बदरीनाथ धाम में भी बुनियादी सुविधाओं की बहाली पर जोर देना होगा। चमोली जिले के  सरकारी अमले के सामने व्यवस्थाओं को बेहतर करने का जिम्मा है। इसलिए अब सरकारी अमला अगले कुछ दिनों से यात्रा तैयारियों में जुट जाएगा। हालांकि सिखों के प्रमुख धाम हेमकुंड साहिब तथा हिंदुओं के प्रसिद्ध तीर्थ लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट 23 मई को खुलने जा रहे हैं। हेमकुंड साहिब मार्ग पर इस साल पहले जैसी बर्फ नहीं है। फिर भी सेना की सिख रेजीमेंट तथा सेवादारों को समय से पहले ही बर्फ हटाने की मुहिम में जुटना होगा।

भराड़ीसैंण में बजट सत्र के मोर्चे पर सरकारी अमला खरा उतरा है। अब चारधाम यात्रा के मोर्चे पर डट कर सरकारी अमले को दूसरी अग्नि परीक्षा से गुजरना है। देखना है कि इस कसौटी पर सरकारी अमला किस तरह खरा उतरता है इस पर ही चारधाम की सुरक्षित यात्रा का भविष्य निर्भर करेगा। 

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