लोक संस्कृति से जुड़ी रहे नई पीढ़ी, विरासत बचाना सबकी जिम्मेदारी – धामी

गोपेश्वर (चमोली)। बदरीनाथ में आयोजित दो दिवसीय देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल के समापन समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की पहचान उसकी लोक संस्कृति में है और नई पीढ़ी को अपनी भाषा, परंपराओं और जड़ों से जोड़ना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि लोकगीत, लोकनृत्य, रीति-रिवाज और पारंपरिक पर्व केवल विरासत नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान हैं, जिन्हें अगली पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।

बदरीनाथ धाम के टूरिस्ट अराइवल प्लाजा में भारतीय सेना और जिला प्रशासन चमोली की ओर से ऑपरेशन सद्भावना के तहत आयोजित महोत्सव में लोक संस्कृति के रंगों के साथ सीमांत जीवन और सेना की भूमिका की झलक दिखाई दी। मुख्यमंत्री ने बामणी गांव पहुंचकर नंदा अष्टमी उत्सव में ग्रामीणों के साथ भाग लिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसकी लोक संस्कृति, लोकगीत, लोकनृत्य और परंपराओं से है। नई पीढ़ी को अपनी भाषा और संस्कृति से जोड़ने के लिए इन परंपराओं को बचाए रखना जरूरी है।

महोत्सव में महिला स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय कारीगरों, किसानों और युवा उद्यमियों ने स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल लगाए। मुख्यमंत्री ने स्टॉलों का निरीक्षण कर उत्पादों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को पर्यटन से जोड़ने से सीमांत क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

समापन समारोह में जीओसी-इन-सी सेंट्रल कमान लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, जीओसी उत्तर भारत एरिया लेफ्टिनेंट जनरल डीजी मिश्रा, ब्रिगेडियर गौरव बत्रा, बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, जिलाधिकारी गौरव कुमार, पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार, बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड आदि मौजूद रहे। समापन समारोह में सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के विजेता और उपविजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया।

हथियारों और सैन्य उपकरणों की प्रदर्शनी

महोत्सव में भारतीय सेना की सैन्य प्रदर्शनी भी लगाई गई। मुख्यमंत्री ने अत्याधुनिक हथियारों और सैन्य उपकरणों की जानकारी ली। प्रदर्शनी में युवाओं और विद्यार्थियों को सीमावर्ती क्षेत्रों में सैनिकों के जीवन, आपदा राहत और जनसेवा कार्यों से भी परिचित कराया गया। धामी ने कहा कि ऑपरेशन सद्भावना के तहत आयोजित ऐसे कार्यक्रम सेना और स्थानीय नागरिकों के बीच सहयोग और आपसी जुड़ाव को मजबूत करते हैं। उन्होंने माणा गांव के ग्रामीणों की पारंपरिक प्रस्तुति की सराहना की।

माणा, नीती और जादुंग पर फोकस

मुख्यमंत्री ने कहा कि वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के जरिए माणा, नीती और जादुंग जैसे सीमांत क्षेत्रों में सड़क, बिजली, दूरसंचार, पर्यटन और आजीविका से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। सरकार का जोर सीमांत क्षेत्रों में स्थानीय रोजगार बढ़ाने और पलायन रोकने पर है। उन्होंने कहा कि मिलेट, सेब, होम स्टे, कृषि, बागवानी, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, सुगंधित पौधों और स्थानीय मसालों की खेती के साथ शीतकालीन एवं साहसिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार प्रदेश में 3.10 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास के साथ विरासत को बचाना भी जरूरी है। लोक भाषा, लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक वेशभूषा, मेले और पर्व उत्तराखंड की पहचान हैं और इनके संरक्षण की जिम्मेदारी सभी की है।

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